काव्यांजलि
Friday, September 2, 2016
शेर
माना कि मेरी शोहरत का हिस्सा रहा है तू ।
पर गुमनामियों में भी कहीं शामिल रहा है तू ।
अनिल उपहार
‹
›
Home
View web version