Monday, April 26, 2021

भरोसा टूटने न दे( कविता)

बस भरोसा न टूटे
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साय साय करती सड़कें
सुनसान पड़े चौराहे,
दूर रह कर जीने की विवशता
सिर्फ कुछ दिनों की परीक्षा है।
परीक्षा है हमारे सब्र की ,
हमारे अंदर बैठी करुणा की।

तो क्यों न ,
थोड़ा एकांत से प्यार करें
घर मे रहकर अपनों से अपनो सा व्यवहार करें,
बेजान हुए रिश्तों में नई जान डाल दे
धूल खाती किताबो की 
थोड़ी धूल झाड़ दे।

वो दिन दूर नही हम फिर से 
हाथों में हाथ ले
गाएंगे प्रेम के तराने।
यात्रा में बेखोफ करेंगे
एक दूजे के साथ  जी भर कर संवाद।
बस थोड़ा सा संयम रख लें

रखले मन मे धीरज
की कुछ भी होजाए
हम सूखने नही देंगे संवेदना की सियाही,
टूटने नही देंगे सब्र का बांध।
फिर सूरज निकलेगा
फिर पंछी करेंगे कलरव
और हम जियेंगे ज़िंदगी
पहले की तरह।

बस कुछ दिन 
आदत डाल लें घर मे रहने की,
कि बेजुबान भी कह उठे
ये आदमी कमबख्त अपनी पर आजाए तो हरा सकता है 
हर महामारी।

डॉ अनिल जैन उपहार

Sunday, April 25, 2021

कोरोना से डरे नही

माना घोर अंधेरी राते, और उजाले कैद हुए।
सूरज संग जुगनू भी सारे लगता है संवेद हुए।

हिम्मत ना टूटे कोई सब आयु कर्म के बन्धन है
आशाओ के दीप जले उम्मीदों से अनुबंधन है।

वक्त बीत जायेगा ये भी बस मन मे विश्वास रखें
कर्मो का लेखा जोखा है इतना सा आभास रखे।

सूरज फिर निकलेगा देखो सब मिल कर यह जतन करें।
पहले भय को दफ़न करें और मानवता को नमन करें।

डॉ अनिल जैन उपहार

Sunday, April 18, 2021

(कोरोना )डरो नही हिम्मत रखो

महामारी गर उग्र हुई तो सब्र हमें करना होगा।
घर मे रह कर चंद दिनों तक खुद को खुद में रखना होगा।
स्वास्थ्य यदि बचा लेंगे तो जीवन खुशहाल बनेगा ही,
तम हारेगा तय है इतना अंधकार भागेगा ही।
इम्तहान की घड़ी आज सबको खरा उतरना है
विश्वास टूटने मत देना बस प्रलय के पंख कुतरना है।
हम फिरसे सशक्त बनेंगे तब चेन तोड़ यह पाएंगे।
कोरोना क्या चीज़ बड़ी हिम्मत से इसे हराएंगे।

डॉ अनिल जैन उपहार

Monday, April 12, 2021

कविता (भावांजलि)गुरुवर विमर्श सागर जी के श्री चरणों में

आचार्य विमर्श सागर जी के चरणों में,,,,,,

आगम निष्ठ तपस्वी वाणी रागद्वेष कल्मष धोती।
'समर्पण के स्वर' संग गूथे "मानतुंग "के अनुपम मोती।'गूंगी चीख' 'वन्दनीय गुरुवर' 'शंका की एक रात'।
'सोचता हूँ कभी कभी' मैं पाऊँ नित्य गुरु आशीर्वाद।
विमार्शनजली,गीतांजलि,वीरागा जंलि क्या खूब कही।
जीवन पानी की बूंद है भैया जीवन चलती हुई घड़ी।
'खूबसूरत लाइने' जाहिद की गज़ले गाती है।
शुद्धात्म साधक कलम योद्धा का चिंतन दर्शाती है ।
है शब्द चितेरे ,कलम धनी,श्रद्धा से करता अभिनंदन
उपहार का पावन चरणों मे स्वीकार करो शत शत वन्दन।

डॉ अनिल जैन उपहार

जिनके चिंतन में झलक रही इस नश्वर जग की नश्वरता।
जिनकी निर्मल वाणी में अमृत का झरना ही झरता।
जिनके पावन दर्शन पाकर आल्हादित होते है भविजन
उन परम पूज्य निर्ग्रन्थ गुरु के चरणों मे शत शत वन्दन।

जिनके पावन श्री मुख से अमृत की निर्झरणी झरती।
जिनके चरण कमल की रज भव तापों की ज्वाला हरती।
तत्वज्ञान से महिमा मंडित है जिनका मौलिक चिंतन,
उन परम पूज्य विमर्श गुरु के चरणों मे शत शत वन्दन।

डॉ अनिल जैन उपहार

Tuesday, April 6, 2021

प्रतीक (कविता)

बातों ही बातों में अक्सर
तुम मुझमे खोने लगते हो।
बीच भंवर में अल्फाज़ो के
भ्रमर जाल बोने लगते हो।

अनुत्तरित से रहे सदा जो
वो सारे प्रश्नों के हल भी
समाधान की बाट जोहते
थक कर सोने चले गए है।

कौन घड़ी किस पल पर ठहरे
स्वप्न खुद ही से छले गए है।

अलसाये पन्नो के सच मे 
अश्रु जल धोने लगते हो।

डॉ अनिल जैन उपहार