काव्यांजलि
Thursday, May 27, 2021
काहे रोना(मुक्तक)
लग गया विराम है कुछ पल का, ना विचलित हमको होना है।
फल पड़े भोगना कर्मों का,यह तो निश्चित ही ढोना है।
शुभ अशुभ राग के गलियारे सब तरफ स्वप्न गर बिखरे हों
जब जीत हार सब अपनी है फिर काहे रोना धोना है।
डॉ अनिल जैन उपहार
Saturday, May 22, 2021
मुक्तक (समर्पण)
मौन का व्याकरण मौन पढ़ता रहा।
कौन उपमान आकर यूं गढ़ता रहा।
छंद प्रतिमान खुद ही बदलने लगे
आचमन प्रेम का प्रेम जढ़ता रहा।
डॉ अनिल जैन उपहार
Tuesday, May 18, 2021
कोरोना
जो मिला हँस कर जिये ये पुण्य के आधीन है।
कर्म गर खोटे किये तो जिंदगी गमगीन है ।
हो महामारी कोई या आपदा की हो घड़ी
वो रहे हर हाल में ख़ुश जो रहे निज लीन है।
डॉ अनिल जैन उपहार
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