Thursday, August 31, 2023

मुक्तक (सकारात्मकता)

जिंदगी जंग है ,ये जंग लड़ेंगे हम भी।

रिक्त जीवन में  कई रंग भरेंगे हम भी

किसी बंधन में बंधे हों  ये जरूरी तो नहीं 

राह कैसी भी हो पर संग चलेंगे हम भी ।

डॉ अनिल जैन उपहार

डॉ अनिल जैन उपहार

Monday, August 28, 2023

रक्षा बंधन (कविता)

हर बार तुमने 
मेरी सूनी कलाई पर 
अपने स्नेह के हस्ताक्षर कर 
अपनी दुआओ के तमाम दस्तावेज
मेरे नाम कर दिए ।
और मैंने भी रवायतो के खाली 
प्रष्ठ पर अपनी जेब के कुछ पल 
तुम्हारी हथेली पर रख 
अपने फ़र्ज़ की इति श्री कर ली ।
क्या सही अर्थों में 
निभा पाया हूँ मै तुम्हारे स्नेह के 
मुल्य कों ?
आज के इस पवित्र दिन 
मेरे हाथों में बंधे इस धागे की कसम 
मेरा वचन है तुम्को 
की अब कोई बहन अपने भाई से 
नही मांगेगी रक्षा का वचन ।
हर भाई ठीक मेरी ही तरह 
निभाएगा हर वो फ़र्ज़ 
जिस पर सिर्फ बस सिर्फ बहन 
तुम्हारा ही हक होगा ।
और दूर चौराहों पर तुम कर सकोगी 
बेखोफ विचरण 
हजारो की भीड़ में और हर वक़्त 
खड़ा पाओगी किसी भाई को अपने 
साथ ।

-----------अनिल उपहार --------

Saturday, August 19, 2023

गीत गुनगुना रहा हूं(गीत)

गीत गुनगुना रहा हूँ गीत बन के आइये।
देहरी पे फिर कोई नवगीत छेड़ जाइये।

मुक्तकों से है नयन छंद सजे अधरों पर।
गेसुओं पे सज रही घनाक्षरी भी झूम कर।
लक्षणा अभिधा जैसा रूप ओढ़ आइये
व्यंजना से स्वर मिले वो काफिया सजाइये।

गुरु लघु सा चित्र लिए रेखाए बता रही।
लय और ताल सी गति ह्रदय पटल पे छा रही।
दोहों और चौपाइयां सी तान लेके आइये।
पायलों की वो मधुर झनकार ले के आइये।

आभा स्वर्ण रश्मियों ने जो रखी कपोल पर।
गीतिका सी लग रही दो पाँखुरी अधर पर।
भोएँ अनुबंध लिख रही थी स्वप्न आइये।
नयनों के अनुप्रास पर गीत तो रचाईये ।

डॉ अनिल जैन उपहार #कॉपीराइट

Thursday, August 10, 2023

मन का पंखेरू(मुक्तक)

अहसासों के आसमान में मन का पखेरू डोल रहा ।

चप्पा चप्पा तेरी कहानी मधु के रस में घोल रहा ।

चंपा जूही और चमेली ने जूडे में फूल गूँथे ,

लगता है तेरे आने से मौसम भी घूँघट खोल रहा ।

---------अनिल उपहार --------

Tuesday, August 8, 2023

समर्पण मन देहरी का,(मुक्तक)

मन देहरी पर देह का ,सच मुच आज समर्पण है ।

अश्रु लगते गंगाजल से ,अर्घ तुम्ही को अर्पण है ।

द्वार पाहुन प्रीत खड़ी है रस्मों की वरमाला ले ,

मुझ में रूप तुम्हारा झलके कैसा मन का दर्पण है ।

--------अनिल उपहार ------

Thursday, August 3, 2023

मुक्तक(प्यार में सौदा नही)

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बस नज़र में प्यार का आधार होना चाहिए ।

चाहतों का हर चमन गुलज़ार होना चाहिए ।

सर्द रातों में लगे  जब चाँद भी   जलने कहीं

तब प्यार में सौदा नही बस प्यार होना चाहिए ।

डॉ अनिल  जैन उपहार

Wednesday, August 2, 2023

कविता( संवेदना की अलगनी)

संवेदन हीनता की अलगनी पर
     टांगते हुए रिश्तों ने 
    खोखली हुई अपनेपन की
   चिटखनी से ,अनायास ही 
फेंक दिया एक प्रश्न,
बंजर होती भावनाए
 मर क्यों गयी ।
अर्थ की चादर 
इतनी महान
कैसे होगई
चरमराते टूटे नेह के 
दरवाज़े से आवाज़ आई
जब जब स्वार्थ
रिश्तों को लीलता रहेगा
हम अपनेपन के धागों को
कमजोर करते रहेंगे
और लगा देंगे गला हुआ
बेबुनियाद थेकला
जो नही होने देगा कभी 
संबंधों की तुरपाई को 
ताकतवर।।।।।।

डॉ अनिल जैन उपहार

Tuesday, August 1, 2023

भागफल सा प्यार तुम्हारा(मुक्तक)

भागफल सा प्यार तुम्हारा और गुणक सी तेरी जुदाई ।

समीकरण सा तेरा मिलना योगफल सी बनी खुदाई ।

हासिल सा तेरा रूठ के जाना और व्याकरण भी गहरा है 

रिश्तों के इस अंक गणित को भोली आँखें जान न पाई ।

-------------अनिल उपहार -------