Friday, June 28, 2024

अधूरा है गीत बिन तुम्हारे(गीतिका)

शब्दों के सागर को मन जब जब खंगाल ने लगा 
हर बार तेरा ही अक्स उभर आया ।
कभी  कविता, कभी गजल ,तो कभी 
छंदों की पायल में ,
तुम्हें ही खनकता पाया ।

मेरे ये गीत मेरे नहीं 
तेरे विश्वास का कोमल अहसास है ।

तन भले ही हो पराया पर मन तुम्हारे पास है।

तभी तो मेरे अधरों पर आज भी 
स्वर तुम्हारे गूंजते है ।
दर्द तो बस गीत रचता है 
तू ही तो है जो हर गीत में बसता है ।

बिन तुम्हारे संकलन आज तक अधुरा है 
न कविता ही पूरी हो सकी, न गीत ही हुआ पूरा है ।

Anil uphar @copy-राइट---------------------

Sunday, June 16, 2024

लहज़ा

यूं तो रिश्तों को निभाने का हुनर आता है ।
हरेक लहजे में बस तू ही तू नजर आता है।
जिसे छू कर के मेरी रूह महक जाया करती ,
तेरी बातों में वो लहज़ा वो असर आता है ।
डा अनिल जैन उपहार

मुक्तक लहज़ायूं तो रिश्तों को निभाने का हुनर आता है ।हरेक लहजे में बस तू ही तू नजर आता है।जिसे छू कर के मेरी रूह महक जाया करती ,तेरी बातों में वो लहज़ा वो असर आता है ।डा अनिल जैन उपहार

बातों में मिश्री सी डली कानों में रस घोल गया ।

आंखों ही आंखों में सब कुछ बोल गया।

पलकों पर सतरंगी सपने आकर ऐसे ठहर गए,

खट्टे मीठे अनुभव सारे एक ही पल में तोल  गया ।

 डा अनिल जैन उपहार ------ ।

मुक्तक

बातों में मिश्री सी डली कानों में रस घोल गया ।

आंखों ही आंखों में सब कुछ बोल गया।

पलकों पर सतरंगी सपने आकर ऐसे ठहर गए,

खट्टे मीठे अनुभव सारे एक ही पल में तोल  गया ।

 डा अनिल जैन उपहार ------ ।

Wednesday, June 5, 2024

चुनाव के बाद

कैसे गज़ब चुनाव हुए हर कोई खुशियां मना रहा है।

कोई अपनों से दूर हुआ कोई अपनों को बना रहा है ।

लोकतंत्र का मूल यही बस ,यहां तंत्र प्रभावी होता है ।

कोई सेहरा बांध रहा है तो कोई सेहरा सजा रहा है ।

डा अनिल जैन उपहार

चुनाव परिणाम के बाद

बचपन के सब शोक थे अपने अजब गजब इन पहियों से।

जीवन की पगडंडी नापी सच में इन दो पहियों से।

खूब गिरे उठकर संभले फिर गिरने को तैयार रहे,

घर की जिम्मेदारी भी क्या खूब निभाई इन पहियों से।

डा अनिल जैन उपहार

Monday, June 3, 2024

विश्व सायकल दिवस पर

बचपन के सब शोक थे अपने अजब गजब इन पहियों से।

जीवन की पगडंडी नापी सच में इन दो पहियों से।

खूब गिरे उठकर संभले फिर गिरने को तैयार रहे,

घर की जिम्मेदारी भी क्या खूब निभाई इन पहियों से।

डा अनिल जैन उपहार