मुक्तक
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इक बार मुझे तुम छू लेते
तो यह तन चन्दन हो जाता |
द्वार द्वार महका होता
आँगन वृन्दावन हो जाता |
शब्दों कों मिलती ऊँचाई
रिश्तों का अर्थ बदल जाता |
तेरी सांसो की खुशबू से
घर मेरा मधुबन हो जाता |
---------अनिल -उपहार -----
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इक बार मुझे तुम छू लेते
तो यह तन चन्दन हो जाता |
द्वार द्वार महका होता
आँगन वृन्दावन हो जाता |
शब्दों कों मिलती ऊँचाई
रिश्तों का अर्थ बदल जाता |
तेरी सांसो की खुशबू से
घर मेरा मधुबन हो जाता |
---------अनिल -उपहार -----
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