गज़ल
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आज कि रात जुबाँ पर ना लगाओ ताले
वरना बदनाम हमे कर देंगे दुनिया वाले |
रात दिन दिल में यही फिक्र लगी रहती है
जान ले ले ना मेरी ये तेरे गेसू काले |
दिल में हसरत हें यही में तेरा दीदार करूं
भेज कर खत मुझे इक बार तो घर बुलवाले |
तेरे कदमों में मैं खुद कों भी निछावर कर दू
आजा आजा मेरी तकदीर बदलने वाले |
मैं ये समझूंगा मेरी जीत यकीनन होगी
अपने उपहार कों इक बार जो तू अपनाले |
------(अनिल उपहार)------
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आज कि रात जुबाँ पर ना लगाओ ताले
वरना बदनाम हमे कर देंगे दुनिया वाले |
रात दिन दिल में यही फिक्र लगी रहती है
जान ले ले ना मेरी ये तेरे गेसू काले |
दिल में हसरत हें यही में तेरा दीदार करूं
भेज कर खत मुझे इक बार तो घर बुलवाले |
तेरे कदमों में मैं खुद कों भी निछावर कर दू
आजा आजा मेरी तकदीर बदलने वाले |
मैं ये समझूंगा मेरी जीत यकीनन होगी
अपने उपहार कों इक बार जो तू अपनाले |
------(अनिल उपहार)------
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