Tuesday, January 28, 2014

--------बेटी --------
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जिंदगी   की  महकती  एक  गंध  है  बेटी  |

कमनीयता  का  सलोना  एक  छंद  है  बेटी |

त्याग  और  बलिदान  के  इतिहास  में,

सेवा  समर्पण  से  जुड़ा  अनुबन्ध  है  बेटी  |


खिले  गुलाब  की  मधुर  एक  पांखुरी  है  बेटी  |

मधुरिम  है  जिससे  जीवन, वह माधुरी  है  बेटी  |

ज़ख़्मी  कलेजे  से  भी, बेदर्द  ज़माने  कों ,

मीठे  सुनाती  नगमें,  वह  बांसुरी  है  बेटी  |

रिश्तों  की  देहरी  पर,  दीप  प्रीत   के  धरे  |

सम्बन्धों  कों  विस्तार  दे, वह  धुरी  है  बेटी |

किलकारियों  से  गोद  भरने  को  ज़माने  की  |

आज  तक  मिटती  रही,  वह  कस्तूरी  है  बेटी  |

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