--------होली------------
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फागुन की मस्ती प्रिये
सूना तुम बिन राग
अलगोजे की तान पर
लगा चिढाने फाग |
सजन तुम क्यों नही आये
विरह की आग जलाये |
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अनिल उपहार
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फागुन की मस्ती प्रिये
सूना तुम बिन राग
अलगोजे की तान पर
लगा चिढाने फाग |
सजन तुम क्यों नही आये
विरह की आग जलाये |
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अनिल उपहार
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