रस्मे उल्फत की अपने दिल में रवानी रखना ।
फिर से मिलने ओ मिलाने की कहानी रखना ।
लाख हो जुल्म के पहरे वफ़ा की राहों में
अपनी आँखों में मुहोब्बत की निशानी रखना ।
----------अनिल उपहार ------
फिर से मिलने ओ मिलाने की कहानी रखना ।
लाख हो जुल्म के पहरे वफ़ा की राहों में
अपनी आँखों में मुहोब्बत की निशानी रखना ।
----------अनिल उपहार ------
No comments:
Post a Comment