मिले जो ज़ख्म उल्फत में उन्हें अपना बनालूं में ।
तेरे हर अश्क कों पलकों पे अपने आ सजालूं में ।
मिली रुसवाईयां हमको भले ही इस ज़माने में
हजारों ग़म भुलाकर के तुझे अपना बनालूं में ।
-------अनिल उपहार ------
तेरे हर अश्क कों पलकों पे अपने आ सजालूं में ।
मिली रुसवाईयां हमको भले ही इस ज़माने में
हजारों ग़म भुलाकर के तुझे अपना बनालूं में ।
-------अनिल उपहार ------
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