मिला हमकों क्या उल्फत में चलो वो आज लिखते है ।
मनुजता के फटे आँचल कों मिलकर साथ सिलते है ।
दिए है अश्क दुनियां ने कोई लेखा नहीं रखता
मुहोब्बत में मिले कितने चलो अब ज़ख्म गिनते है ।
--------अनिल उपहार -------
मनुजता के फटे आँचल कों मिलकर साथ सिलते है ।
दिए है अश्क दुनियां ने कोई लेखा नहीं रखता
मुहोब्बत में मिले कितने चलो अब ज़ख्म गिनते है ।
--------अनिल उपहार -------
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