बरसों से मचलती चाह के इज़हार का दिन है ।
संस्कारों में लिपटी आह के इंकार का दिन है ।
मन देहरी पर प्रीत के कुछ अर्घ रख आयें
सुना है आज का दिन प्यार के इकरार का दिन है ।
-----------अनिल उपहार -------
संस्कारों में लिपटी आह के इंकार का दिन है ।
मन देहरी पर प्रीत के कुछ अर्घ रख आयें
सुना है आज का दिन प्यार के इकरार का दिन है ।
-----------अनिल उपहार -------
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