जीवन में विश्वास जगाती ।
देखो उडती आज पतंगें।
सदभावों के गीत सुनाती ।
देखो उडती आज पतंगें ।
अंधकार हारेगा निश्चित ।
जुगनुओं में होड़ लगी है ।
सूरज से बतियाती लगती ।
देखो उडती आज पतंगें ।
नहीं परिंदा कोई फसेगा ।
नफरत की इस डोर में ।
जियो और जीनेदो सबकों ।
कहती उडती आज पतंगें ।
मकर सक्रांति की हार्दिक शुभ कामनाये ।
---------अनिल उपहार ------
देखो उडती आज पतंगें।
सदभावों के गीत सुनाती ।
देखो उडती आज पतंगें ।
अंधकार हारेगा निश्चित ।
जुगनुओं में होड़ लगी है ।
सूरज से बतियाती लगती ।
देखो उडती आज पतंगें ।
नहीं परिंदा कोई फसेगा ।
नफरत की इस डोर में ।
जियो और जीनेदो सबकों ।
कहती उडती आज पतंगें ।
मकर सक्रांति की हार्दिक शुभ कामनाये ।
---------अनिल उपहार ------
No comments:
Post a Comment