ज़िन्दगी के गीत का वो अनछुआ किरदार है ।
हर्फ़ है वो प्यार का या इक मधुर तकरार है ।
हर सलीका था गजब जब तोड़ आया वो भरम
हर अदा कहने लगी ये प्यार का इज़हार है ।
अनिल उपहार
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