भारत माता सिसक रही है सरहद की लाचारी पर ।
और विवश है ज़र्रा ज़र्रा दोगली तैयारी पर ।
खून बहाया बेटो ने बलिदान व्यर्थ नही जायेगा ।
सिर्फ राख छाई है थोड़ी धधकती चिंगारी पर ।
अनिल उपहार
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