तू ज़माने की नज़र में इक बड़ा फनकार है ।
बेच दे अपनी अना को जा खुला बाजार है ।
मैं पला हूँ ज़िन्दगी भर धूप की आगोश में
मखमली कालीन पर चलना मेरा दुश्वार है ।
अनिल जैन उपहार
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