बिस्तर की सलवटों में कहीं खो गया वो चाँद ।
सिर्फ इक छुअन से निखर सो गया वो चाँद ।
आँखों की शरारत को शगुन समझ बैठा वो
दाग फिर जुदाई के सब धो गया वो चाँद ।
अनिल उपहार