Tuesday, March 28, 2017
Thursday, March 9, 2017
Wednesday, March 8, 2017
मुक्तक
बिस्तर की सलवटों में कहीं खो गया वो चाँद ।
सिर्फ इक छुअन से निखर सो गया वो चाँद ।
आँखों की शरारत को शगुन समझ बैठा वो
दाग फिर जुदाई के सब धो गया वो चाँद ।
अनिल उपहार
Subscribe to:
Posts (Atom)