देह की हर दस्तक में घोल रही है मिठास जीवन जल उलीचती तुम्हारी यादें । उस प्रथम चिठ्ठी की तरह जिसका हर्फ़ हर्फ़ महक रहा है आज भी तुम्हारी खुशबू से ।
अनिल जैन उपहार
No comments:
Post a Comment