Tuesday, October 10, 2017

कविता(दीप माला)

अप्रतिम सौंदर्य और
उदात्त विचारों को
अभिव्यक्त करता
उसका संवाद ।
अनु भव के केनवास पर
कुशलता से उकेर देना
मन के जज़्बात ।
बखूबी आता था उसे
हल कर देना
रिश्तो का गणित
संवेदना की हर इबारत
लिख जाती थी
उसके आने की
अनकही दासता ।
प्रतीक्षा थी तो बस
उसके लौट आने की ।
कोई दीप माला लिये
बैठा है
मन की चौखट पर ।

अनिल उपहार

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