Friday, April 27, 2018

मुक्तक(अनछुआ किरदार)

ज़िन्दगी के गीत का वो अनछुआ किरदार है ।

हर्फ़ है वो प्यार का या इक मधुर तकरार है ।

हर सलीका था गजब जब तोड़ आया वो भरम

हर अदा कहने लगी ये प्यार  का इज़हार है ।

अनिल उपहार

Saturday, April 14, 2018

अम्बेडकर जयंती पर

इतिहासों के शिलालेख पर जिसने अपना नाम कर दिया ।
अपनी प्रतिभा से ऊंचा ,विश्व गुरु का भाल कर दिया ।
माना दलित रहे वो पर,लेकिन युग निर्माता थे
जिसकी विद्वत्ता के आगे,अच्छे अच्छे थर्राते थे ।
संविधान निर्माता बन वो, हालातो से समर कर गए।
बाबा साहब नाम कमाकर,दलितों का नाम अमर कर गए ।

उदित भास्कर जिसको  अपने,तेज से मंडित करता हो ।
उनकी तर्क शक्ति के आगे,हर मंसूबा पानी भरता हो ।
स्वयं रहे वो अंधियारों में ,बनकर भोर चले आये ।
जाति पाती का भेद मिटाने,ले वैचारिक दौर चले आये ।
ऐसी गौरव गाथा लिखदें, हम उनके यश गान की
युगों युंगों तक ऋणी रहेगी,माटी हिंदुस्तान की ।

ऊंच नीच का जीवन भर ,जिसने दंश सहा था।
जिसकी रग रग में फिर भी,जन गण मन ही बहा था ।
अग्र दूत बन वह शांति का,बिगुल बजाने निकल गया ।
भारत माँ की स्वर्णिम झांकी पर,कलश सजाने निकल गया ।
उनकी पौरुष गाथा पर मैं,शब्दों के सुमन चढ़ाता हूँ ।
पुण्य दिवस पर आज उन्हें,भावों के अर्घ चढ़ाता हूँ ।

अम्बेडकर सिर्फ नाम नही,नाम है स्वाभिमान का ।
जनमानस के हृदयपटल पर ,भिखरी उस मुस्कान का ।
अम्बेडकर है दीप यज्ञ का,जन गण मन के गांन का ।
अम्बेडकर है नाम जगत में ,मानवता की पहचान का ।
सिर्फ पिछड़ों के ही नही थे वो,जनजन के राज दुलारे थे ।
अखिल विश्व की गरिमा के,प्रभापुंज थे तारे थे ।
ओ मानवता के महा मसीहा, समरसता के संत हो तुम ।
सकल विश्व की गरिमा के ,गौरव हो श्रीमंत हो तुम ।

अनिल उपहार