इतिहासों के शिलालेख पर जिसने अपना नाम कर दिया ।
अपनी प्रतिभा से ऊंचा ,विश्व गुरु का भाल कर दिया ।
माना दलित रहे वो पर,लेकिन युग निर्माता थे
जिसकी विद्वत्ता के आगे,अच्छे अच्छे थर्राते थे ।
संविधान निर्माता बन वो, हालातो से समर कर गए।
बाबा साहब नाम कमाकर,दलितों का नाम अमर कर गए ।
उदित भास्कर जिसको अपने,तेज से मंडित करता हो ।
उनकी तर्क शक्ति के आगे,हर मंसूबा पानी भरता हो ।
स्वयं रहे वो अंधियारों में ,बनकर भोर चले आये ।
जाति पाती का भेद मिटाने,ले वैचारिक दौर चले आये ।
ऐसी गौरव गाथा लिखदें, हम उनके यश गान की
युगों युंगों तक ऋणी रहेगी,माटी हिंदुस्तान की ।
ऊंच नीच का जीवन भर ,जिसने दंश सहा था।
जिसकी रग रग में फिर भी,जन गण मन ही बहा था ।
अग्र दूत बन वह शांति का,बिगुल बजाने निकल गया ।
भारत माँ की स्वर्णिम झांकी पर,कलश सजाने निकल गया ।
उनकी पौरुष गाथा पर मैं,शब्दों के सुमन चढ़ाता हूँ ।
पुण्य दिवस पर आज उन्हें,भावों के अर्घ चढ़ाता हूँ ।
अम्बेडकर सिर्फ नाम नही,नाम है स्वाभिमान का ।
जनमानस के हृदयपटल पर ,भिखरी उस मुस्कान का ।
अम्बेडकर है दीप यज्ञ का,जन गण मन के गांन का ।
अम्बेडकर है नाम जगत में ,मानवता की पहचान का ।
सिर्फ पिछड़ों के ही नही थे वो,जनजन के राज दुलारे थे ।
अखिल विश्व की गरिमा के,प्रभापुंज थे तारे थे ।
ओ मानवता के महा मसीहा, समरसता के संत हो तुम ।
सकल विश्व की गरिमा के ,गौरव हो श्रीमंत हो तुम ।
अनिल उपहार
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