Friday, May 4, 2018

मुक्तक(प्यास)

मैं तो दरिया हूँ समंदर की आस रखता हूँ ।
भीगी पलकें हैं मगर लब पे प्यास रखता हूँ
एक मुद्दत हुई देखा न जिसको आंखों ने
मैं उसी खास का अहसास पास रखता हूँ

अनिल जैन उपहार

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