यूँ तो खो देने के डर ही दहक जाता हूँ ।
हिचकियाँ जब भी जगाए तो बहक जाता हूँ ।
अज़ीब कारीगरी है हँसी निगाहों की ,
वो जो छू ले तो मैं संदल सा महक जाता हूँ ।
अनिल जैन उपहार
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