Friday, August 24, 2018

कविता(गर तुम आओ)

अगर तुम आओ अपनी हाजरी देने
तो खामोशियों के दस्तावेज साथ मत लाना।
पैरवी कर रही निगाहों ने
दे दिया है हलफनामा
अपनी गवाही का,
फैसले की प्रतीक्षा
करना है मिलकर
उदासियों के द्वार की
चाबी
हो सके तो लेते आना ।

अनिल जैन उपहार

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