गुज़रे महीनों और दिनों का सारा लेखा जोखा दर किनार करते है, आओ फिर से समपर्ण की स्याही से संबंधों के शिलालेख पर हस्ताक्षर करते है । और करते है अगवानी नूतन वर्ष की । प्रश्न चिन्हों के अंतिम अर्घ्य से विदाई इस गुज़रे साल की ।
अनिल जैन उपहार
No comments:
Post a Comment