सुरमई पत्तों पर पड़ी ओस की बूंदे दे रही है गवाही बीती रात के समर्पण की। लेकिन भोर की पहली किरण, लिख देना चाहती है नूतन अध्याय, नए संकल्प और विकल्पों के बीच, अनागत की प्रतीक्षा में सहेजे हुए लम्हो के साथ।
अनिल जैन उपहार
No comments:
Post a Comment