मन अनुभव के बीज लिये संवेदना की जमीन पर टटोलता रहा नमी कि रचना की पैदावार हो अच्छी, और भाषा की नई तहजीब गढ़ दे, बना रहे भाषा का शील ।।।।। शायद यही है कवि मन का उदबोधन।।।
डॉ अनिल जैन उपहार
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