Saturday, May 2, 2020

ओ कोरोना

ओ कोरोना
माना आज मध्यलोक की
पूरी धरा कुपित है
शापित है
तेरे तांडव से ,
जूझ रही है भारत भूमि
तेरे विकराल रूप से
पर शायद तुझे पता नहीं
ये पुण्य धरा है सन्तों की
जहाँ अच्छे अच्छे प्रलय
हमने रोक दिए है ,सिर्फ
अहिंसा और अपने
मजबूत इरादों से ।
जितना इम्तहान लेना है
ले ले पर याद रखना
हमे अच्छेसे आता है
तुझसे निपटना।
विदेशी समान हमारे यहाँ
ज्यादा दिन नही टिकता
तुझे भी अलविदा होना ही है
अरे-
हम तो विदा भी तुझे हाथ जोड़कर
ही करेंगे।
तेरी विदाई में हमने
कर दिए है खाली चैराहे,सड़कें,
और बाजार
गर हिम्मत है तो तोड़ कर दिखा
हमारे धैर्य को ।
आ ये लोक डाउन तेरा उपहास
किस तरह उड़ा रहा है
पुलिस के जवान और
देवदूत बने ये डॉक्टर
काफी है तेरे लिए
अरे ओ निर्लज्ज हो सके तो
लौट जा अपने देश ।।।

डॉ अनिल जैन उपहार

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