गाया हर गीत में तुमको न यूँ अब आहे भरो।
मेरा आधार बनो।
हमसे रूठा न करो।
मेरी ग़ज़लों के हो उनवान तुम्ही।
मेरे हर छंद कविता के हो उपमान तुम्ही।
तुम्ही महकते रहे मुक्तकों में कहीं।
तुम्ही से यादों की ये सरिता जो बही।
तुम्ही हो मेरी इबादत तुम्ही अरदास वही
हमसे रूठा ना करो ।
बातों में तेरे शहद सी है घुली।
रूप की धूप में यादें है धुली।
तुम्ही से शाम मेरी और ये परछाई तुली
तुम्ही हो रागिनी संग मेरी जो सांसों में घुली
तुम्ही हो ज़िन्दगी का गान और बखान तुम्ही
हमसे रूठा न करो ।
डॉ अनिल जैन उपहार
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