काव्यांजलि
Sunday, September 6, 2020
मुक्तक(ज़हन में )
ज़हन में हर घड़ी मेरे तेरी यादों का साया है ।
मगर तू है नही मेरा,नहीं लगता पराया है ।
किसी की आंख का आँसू चुरा पलकों पे रख लेना
मुहोब्बत का यही लहज़ा तो मैने तुमसे पाया है ।
डॉ अनिल जैन उपहार
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