काव्यांजलि
Thursday, January 7, 2021
मुक्तक असर (ज़िंदा है )
उसके लहजे में अदब और असर भी जिंदा है ।
उसके अहसास में शामिल वो सफर ज़िंदा है ।
जिसकी हर बात में मिश्री सी घुली लगती है
उसके अल्फ़ाज़ में उल्फत का शहर ज़िंदा है ।
डॉ अनिल जैन उपहार
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