Tuesday, July 27, 2021

प्रभाव(मुक्तक)

ज़िन्दगी तूने दिखाए वो सपन देख लिए।

फरेबी दुनियां में अपनों के चलन देख लिए।

यहाँ घुलता हुआ रिश्तों में ज़हर देखा है,

अर्थ की दौड़ में लाशो के कफ़न देख लिए।

डॉ अनिल जैन उपहार

Saturday, July 24, 2021

लहज़ा (कविता)

ये जो तुम्हारे सख्त लहज़े की 
तहरीर  है न 
बड़ा नर्म अहसास 
कराती है 
पथराई आंखों को ।
शायद इन्ही में गुम तो 
नहीं 
हौसलो के पर 
जो खींच लाये है 
तुम्हे धरती से 
आसमा पर ।

अनिल जैन उपहार

Saturday, July 17, 2021

मुक्तक(लालसा)

मन हुआ छोटा बहुत पर कामना मरती नही ।

तन भले ही साथ ना दे वासना मरती नहीं ।

 सांस जब अपनी नही  किस बात का गुमान फिर 

धन बहुत है पास लेकिन लालसा मरती नहीं ।

अनिल उपहार

Friday, July 9, 2021

गीतिका (तू ही मधुर साज है)

लेखनी बेबस जुबा खामोश है 
कैसे कहदूँ कि तू मेरे पास है ।
बिन तेरे कुछ और भाता नहीं
तू है कि लौट कर आता नहीं ।
छंद का अनुप्रास हो तुम
गीत का आगाज़ हो तुम।
ग़ज़ल का उनवान भी तुम
साहित्य का दिनमान भी तुम।
व्याकरण हो तुम ही रस्मों रीत का
हो सुखद अहसास पहली प्रीत का।
फिर भी तेरे होने का हर घड़ी अहसास है 
गीत भी तू ही मेरा ,तू ही मधुर आवाज़ है।

डॉ अनिल जैन उपहार (कॉपीराइट)

Thursday, July 1, 2021

मुक्तक

टूटकर जो गिरा उसको भी सहारा देना।
भूले राही को उम्मीदों का किनारा देना।
ये अभावों का सफर पीछे छूट जाएगा
मन के हारे को उमंगो का सितारा देना।

डॉ अनिल जैन उपहार