काव्यांजलि
Wednesday, January 19, 2022
गीतिका /गोद मे मां की
कभी प्यार में फिसल के देखो ।
अंधियारों कों निगल के देखो ।
खाकर ज़ख्म संभल के देखो ।
अपनी सोच बदल के देखो ।
खुशियों से भर जाओगे तुम
गोद में माँ की मचल के देखो।
-------डॉ-अनिल जैन उपहार ----
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