Wednesday, August 31, 2022

मुक्तक

जिंदगी जंग है तो जंग लड़ेंगे हम भी।

रिक्त जीवन में  कई रंग भरेंगे हम भी

किसी बंधन में बंधे हों  ये जरूरी तो नहीं 

राह कैसी भी हो पर संग चलेंगे हम भी ।

डॉ अनिल जैन उपहार

डॉ अनिल जैन उपहार

Monday, August 29, 2022

मुक्तक ।।।। श्रृंगार

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कहूँ कैसे की कोई कर गया पावन मेरे मन कों ।

छुआ महंदी भरे हाथों से चन्दन कर दिया तन कों ।

नहीं अब जी कहीं लगता वो लम्हा याद आता है ,

किसी के प्रेम की बारिश भिगो कर जब गयी मन कों ।

----- डॉ अनिल जैन उपहार

Sunday, August 28, 2022

रक्षा कवच कविता

हर बार तुमने 
मेरी सूनी कलाई पर 
अपने स्नेह के हस्ताक्षर कर 
अपनी दुआओ के तमाम दस्तावेज
मेरे नाम कर दिए ।
और मैंने भी रवायतो के खाली 
प्रष्ठ पर अपनी जेब के कुछ पल 
तुम्हारी हथेली पर रख 
अपने फ़र्ज़ की इति श्री कर ली ।
क्या सही अर्थों में 
निभा पाया हूँ मै तुम्हारे स्नेह के 
मुल्य कों ?
आज के इस पवित्र दिन 
मेरे हाथों में बंधे इस धागे की कसम 
मेरा वचन है तुम्को 
की अब कोई बहन अपने भाई से 
नही मांगेगी रक्षा का वचन ।
हर भाई ठीक मेरी ही तरह 
निभाएगा हर वो फ़र्ज़ 
जिस पर सिर्फ बस सिर्फ बहन 
तुम्हारा ही हक होगा ।
और दूर चौराहों पर तुम कर सकोगी 
बेखोफ विचरण 
हजारो की भीड़ में और हर वक़्त 
खड़ा पाओगी किसी भाई को अपने 
साथ ।

-----------अनिल उपहार --------

Friday, August 26, 2022

मुक्तक।।।बुजुर्गो की दुआओं का

समंदर गम का गहरा था किनारा मिल गया मुझको।
राह दुर्गम थी अंधियारी सितारा मिल गया मुझको।
ये मेरी खुश नसीबी थी मैं तन्हा हो नही पाया,
बुजुर्गों की दुआओं का सहारा मिल गया मुझको ।
----------अनिल उपहार ------