काव्यांजलि
Monday, August 29, 2022
मुक्तक ।।।। श्रृंगार
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कहूँ कैसे की कोई कर गया पावन मेरे मन कों ।
छुआ महंदी भरे हाथों से चन्दन कर दिया तन कों ।
नहीं अब जी कहीं लगता वो लम्हा याद आता है ,
किसी के प्रेम की बारिश भिगो कर जब गयी मन कों ।
----- डॉ अनिल जैन उपहार
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