काव्यांजलि
Saturday, May 27, 2023
भौतिकता
दम तोड़ती प्रतीक्षा में
उम्मीद की सांसे,
व्याकुल हो निहारती
अनागत की कोई आहट।
हर बार हार और जीत के
बेमेल खेल में
संघर्ष की दास्तां
आखिर कब तक
लिखे कोई।
शायद यही है नियति उसकी
क्योंकि औरत जो है वो।।।।
डा अनिल जैन उपहार
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