काव्यांजलि
Tuesday, June 13, 2023
मां हिन्दी(मुक्तक)
गरीबों की यह रोटी है अमीरों का निवाला है।
बन रसखान तुलसी सूर मीरा दिनकर निराला है।
रहे महलों में या हो झोपड़ी बेटों सा पाला है,
मां हिन्दी ने हम बेटों को दे आशीष ढाला है।
डा अनिल जैन उपहार
No comments:
Post a Comment
‹
›
Home
View web version
No comments:
Post a Comment