काव्यांजलि
Wednesday, June 28, 2023
मुक्तक(अहसास बन ढल जाना)
मै समर्पण लिखूं अहसास बन तू ढल जाना ।
दिल के सागर में तू दरिया सी बन मचल जाना ।
मेरी सांसों में समाया है तू धड़कन बन कर
चाहे बदले ये ज़माना न तुम बदल जाना ।
अनिल जैन उपहार@कॉपी राइट
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