Monday, July 24, 2023

लहज़ा (कविता,)

ये जो तुम्हारे सख्त लहज़े की 
तहरीर  है न 
बड़ा नर्म अहसास 
कराती है 
पथराई आंखों को ।
शायद इन्ही में गुम तो 
नहीं 
हौसलो के पर 
जो खींच लाये है 
तुम्हे धरती से 
आसमा पर ।

अनिल जैन उपहार

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