मासूम चीत्कार
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दरख़्तों पर पड़ी
बारिश की पहली बून्द ने
नन्ही कोंपल के बदन पर
सुरमई हस्ताक्षर क्या किये
उसका पोर पोर
किलकारियों से गूंजने लगा ।
ठीक उसी तरह
तुम्हारी देह के किसी कोने में ,
मेरी आहट पा, ख़ुशी से सराबोर
होगई थी तुम ।
लेकिन मेरा होना
तुम्हारी इच्छाओ को लील गया
और मेरे जनक की रूढ़िवादी
विचार धारा ने तुम्हारी ममता को
तार तार कर दिया ।
छोड़ आई तुम मुझे अपनी ममता से
दूर
और कर दिया
शांत खामोश सदा के लिए ।।।।।।।
डॉ अनिल जैन उपहार
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