Tuesday, November 14, 2023

खालीपन (कविता)

अनगिनत कल्पनाओं के 
गहरे रास्तों से गुजरते हुए,
तुम्हारे साथ गुजारे हुए
हर एक लम्हें ने घोल दी
सचमुच मिठास।
शालीनता और विनम्रता का
अदभुत सेतु था तुम्हारे और
मेरे बीच,
मर्यादा का हर अनुबंध
तुम्हारे ही तो हिस्से बंधा था।
संजीदगी और सादगी
पर्याय थे तुम्हारे,
रिश्तों को निभाने का
एक जुनून था तुम्हारे भीतर।
फिर भी 
एक अजीब सा खालीपन था
तुम्हारे अंदर,
वक्त की तेज आंधी ने 
पता नहीं क्यों ,
खामोशी का दुशाला
डाल दिया था अधरों पर।
आंखों का मौन सब कर जाता
बया
तुम्हारे न चाहने पर भी,
शायद यही खूबी
तुम्हे असाधारण बनाने की
पर्याप्त क्षमताएं दे गई।

डा अनिल जैन उपहार

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