Wednesday, September 18, 2024

मुक्तक(बसर कर दो)

जहाँ बरसों था विराना वहाँ आकर बसर करदो ।

मेरे गीतों को स्वर देकर प्रेम  के रस से तर करदो ।

मिलेंगे सैकड़ो किस्से यहाँ पर हीर रांझा के ,

ह्रदय के पट ज़रा खोलो मुहोब्बत कों अमर करदो ।

डा अनिल उपहार -------
09413666511

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