Wednesday, September 4, 2024

छंद गीतों ने उतारे(मुक्तक)

मन देहरी पर बस निशा हो आगमन के ही तुम्हारे।

भोर की उजली किरण फिर बांचती हो खत हमारे।

द्वार पर जलता दिया रख आस ने कुछ यूं कहां,

तृप्ति ने अनुबंध लिख कुछ छंद गीतों के उतारे।

डा अनिल जैन उपहार

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