काव्यांजलि
Thursday, December 19, 2024
मुक्तक छंदों को पायल
चलो छंदों की पायल में तुझे फिर से सजा लू मै।
मेरी ग़ज़लों में तू ढल जा तुझे मतला बना लू मै।
तड़पता गीत है तुम बिन,सिसकती हर रूबाई है,
हजारों ग़म भुलाकर के तुझे अपना बना लू मै।
डा अनिल जैन उपहार
No comments:
Post a Comment
‹
›
Home
View web version
No comments:
Post a Comment