गज़ल
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तुम बिन हें सूनी सूनी मेरे दिल की ये राहें |
सावन में भी जलाती हें खामोश निगाहें |
माना कि बहुत दूर हें तू मेरी पहुँच से
बैचेन बहुत करती हें पर तेरी निगाहें |
जो कर रहे है प्यार उसे सारी जिंदगी
दोनों ही निभाने कि कसम बैठ के खाए |
तुम घर बसा के अपना कहीं पर भी जाइये
लेकिन रहेगी साथ तेरे मेरी दुआए |
तू आरजू हें मेरी तो में आरजू तेरी |
चाहत कि हरेक रस्म निभाती हें निगाहें |
दो चीज जिसके पास हें वो खुश नसीब है
आशीर्वाद बाप का और माँ कि दुआए |
जो जख्म मिले हमको वो ताजा हें आज भी
लेकिन ये शर्त हें कि किसी कों ना दिखाए |
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( अनिल उपहार )
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तुम बिन हें सूनी सूनी मेरे दिल की ये राहें |
सावन में भी जलाती हें खामोश निगाहें |
माना कि बहुत दूर हें तू मेरी पहुँच से
बैचेन बहुत करती हें पर तेरी निगाहें |
जो कर रहे है प्यार उसे सारी जिंदगी
दोनों ही निभाने कि कसम बैठ के खाए |
तुम घर बसा के अपना कहीं पर भी जाइये
लेकिन रहेगी साथ तेरे मेरी दुआए |
तू आरजू हें मेरी तो में आरजू तेरी |
चाहत कि हरेक रस्म निभाती हें निगाहें |
दो चीज जिसके पास हें वो खुश नसीब है
आशीर्वाद बाप का और माँ कि दुआए |
जो जख्म मिले हमको वो ताजा हें आज भी
लेकिन ये शर्त हें कि किसी कों ना दिखाए |
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( अनिल उपहार )
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