Tuesday, January 21, 2014

 --- कविता ---
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मैं नहीं जानता 
विचारों की गहराई,
असीमित भावों का 
विशाल शब्द कोश |
पर हाँ,
इतना अहसास आज भी 
जिन्दा है 
अंतर मन में कहीं |
कविता,
अभिव्यक्ति के उच्छ्रंखल आँगन 
में 
नहीं खेलती |
वो पल पल निखरती है 
शब्दों के सागर में,
संवरती है तहज़ीब के लहज़े में,
बस् सिखाती है 
भाषा में आदमी होने की तमीज़ |
----अनिल उपहार ---

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