------------अस्मिता------------
-------------------------
हर बार देती रही
अग्नि परीक्षा |
जैसे स्त्री होना गुनाह रहा उसका,
मनु के विधान की तरह
समझा गया सभी बुराइयों की जड़,
कभी जाति के नाम पर
तो कभी
धार्मिक कर्मकाण्डो,
आडम्बरों के नाम पर |
झोंक दी गई ,बलि कर दी गई
उसकी अस्मिता |
पुरुष बन सकता है
पिता होते हुए भी सब कुछ
वह माता बनकर
कुछ और क्यों नही बन सकती ?
बचपन में पिता की चौकसी
युवावस्था में पति का पहरा
और
बुढ़ापे में पुत्र रखे उस पर नज़र
जैसे वह जन्म जात अपराधिनी हो |
कभी उसे रमणी, कामिनी ,भोग्या
पदवी से विभूषित किया गाया |
तो कभी, जिस्म के व्यापार में
धकेल दिया गया |
हमे ही आधार बना
कविता देती रही
अनुभूतियों कों दस्तक |
वैचारिक शून्यता और
आस्था का अभाव
क्या दे पायेगा ?
हमारी अस्मिता कों नया आकाश |
-----------अनिल उपहार ------------
"काव्यांजलि" नयापुरा रोड पिडावा (राजस्थान)
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हर बार देती रही
अग्नि परीक्षा |
जैसे स्त्री होना गुनाह रहा उसका,
मनु के विधान की तरह
समझा गया सभी बुराइयों की जड़,
कभी जाति के नाम पर
तो कभी
धार्मिक कर्मकाण्डो,
आडम्बरों के नाम पर |
झोंक दी गई ,बलि कर दी गई
उसकी अस्मिता |
पुरुष बन सकता है
पिता होते हुए भी सब कुछ
वह माता बनकर
कुछ और क्यों नही बन सकती ?
बचपन में पिता की चौकसी
युवावस्था में पति का पहरा
और
बुढ़ापे में पुत्र रखे उस पर नज़र
जैसे वह जन्म जात अपराधिनी हो |
कभी उसे रमणी, कामिनी ,भोग्या
पदवी से विभूषित किया गाया |
तो कभी, जिस्म के व्यापार में
धकेल दिया गया |
हमे ही आधार बना
कविता देती रही
अनुभूतियों कों दस्तक |
वैचारिक शून्यता और
आस्था का अभाव
क्या दे पायेगा ?
हमारी अस्मिता कों नया आकाश |
-----------अनिल उपहार ------------
"काव्यांजलि" नयापुरा रोड पिडावा (राजस्थान)
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