--------------बेटी ---------
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ये बेटी घर की शोभा है जन जन कों समझाऊंगा |
इस बेटी की तुम्हें हकीकत से अवगत करवाऊंगा |
इस बेटी की खातिर घर का बच्चा बच्चा रोता है |
जब ये घर से जाती है तो सूना आँगन होता है
इस बेटी ने सारे संकट अपने नाम लिखाएं है |
इस बेटी के अरमानो के हमने दीप बुझायें है
ये बेटी परिवार के अंदर बीज प्यार के बोती है |
और बेटी हम लोगों के झूठे बर्तन धोती है |
इस बेटी कों लगा रखा है इंजेक्शन बेहोंशी का |
इस बेटी के पास मिलेगा सर्टिफिकेट निर्दोषी का |
जितना स्वागत हो गंगा का उतना ही करो किनारों का |
कभी भूलकर हनन न करना तुम इनके अधिकारों का |
२
शान बाप की रखती है ये बदनामी से डरती है |
और बुडापे में ये बेटी माँ की सेवा करती है |
ये बेटी घर में भाभी के दिन भर ताने सहती है |
जब ये बाहर जाति है तो नजर झुकाये रहती है |
इस बेटी की सच कहता हूँ लीला अपरमपारा है |
इस बेटी कों बेटी समझो ये जन जन का नारा है |
इस बेटी ने अटकाएं है हर इक दौर में रोड़े है |
इस बेटी की खातिर हमने धनुष तलक भी तोड़े है |
ये बेटी तो पर्वत भी और ये बेटी राई भी |
वाल्मीकि रामायण है और तुलसी की चोपाई भी |
इस बेटी की ममता कों तुम देखो मत ललकारो रे
इस बेटी कों ओ नादानो पेट में ही मत मारो रे |
३
ये बेटी ससुराल के अंदर बड़ी मुसीबत सहती है |
ये बेटी फिर घबराकर के आत्मदाह कर लेती है |
उनकी बेटी कुवांरी रहती जिनके घर में तंगी है |
बेटो पर भी नही लंगोटी और बेटी अधनंगी है |
और इस बेटी की कहीं कहीं तो बहुत बड़ाई होती है |
और कहीं पे इस की खातिर विकट लड़ाई होती है |
इस बेटी की आज जुबाँ पर लगा हुआ क्यों ताला है
इस बेटी पर कवियों ने भी आलखंड लिख डाला है |
नही सुरक्षित है क्यों बेटी बोलो बंद मकानों में |
इस बेटी की इज्जत हमने लुटती देखी थानों में |
मिटा सको तो आगे बढकर उसकी खुरच मिटा दो रे |
देश भक्ति जन सेवा क्या है ये सबको बतलादो रे |
४
ये बेटी है महालक्ष्मी और भूखी प्यासी भी है |
और अभागन है ये बेटी और कहीं दासी भी है |
इस बेटी के लिए भीम ने तोड़ के रख दी जंघा भी |
ये बेटी कावेरी भी है, जमना भी और गंगा भी |
खुद की चिंता नही है इसको ओरो के गम धोती है |
और ये बेटी सिर्फ़ रात में छह घंटे ही सोती है |
इस बेटी की त्याग तपस्या गली गली में बिखरी है |
ये बेटी है सती अनुसुइया और सति सावित्री है |
खुल कर के आगे आजाओ अब पूरी तयारी से |
इस बेटी कों मुक्त कराओ नफरत की बीमारी से |
आज जो मसला उलझ रहा है वो इनके सम्मान का है |
दोष अकेले नही किसी का सारे हिन्दुस्तान का है |
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ये बेटी घर की शोभा है जन जन कों समझाऊंगा |
इस बेटी की तुम्हें हकीकत से अवगत करवाऊंगा |
इस बेटी की खातिर घर का बच्चा बच्चा रोता है |
जब ये घर से जाती है तो सूना आँगन होता है
इस बेटी ने सारे संकट अपने नाम लिखाएं है |
इस बेटी के अरमानो के हमने दीप बुझायें है
ये बेटी परिवार के अंदर बीज प्यार के बोती है |
और बेटी हम लोगों के झूठे बर्तन धोती है |
इस बेटी कों लगा रखा है इंजेक्शन बेहोंशी का |
इस बेटी के पास मिलेगा सर्टिफिकेट निर्दोषी का |
जितना स्वागत हो गंगा का उतना ही करो किनारों का |
कभी भूलकर हनन न करना तुम इनके अधिकारों का |
२
शान बाप की रखती है ये बदनामी से डरती है |
और बुडापे में ये बेटी माँ की सेवा करती है |
ये बेटी घर में भाभी के दिन भर ताने सहती है |
जब ये बाहर जाति है तो नजर झुकाये रहती है |
इस बेटी की सच कहता हूँ लीला अपरमपारा है |
इस बेटी कों बेटी समझो ये जन जन का नारा है |
इस बेटी ने अटकाएं है हर इक दौर में रोड़े है |
इस बेटी की खातिर हमने धनुष तलक भी तोड़े है |
ये बेटी तो पर्वत भी और ये बेटी राई भी |
वाल्मीकि रामायण है और तुलसी की चोपाई भी |
इस बेटी की ममता कों तुम देखो मत ललकारो रे
इस बेटी कों ओ नादानो पेट में ही मत मारो रे |
३
ये बेटी ससुराल के अंदर बड़ी मुसीबत सहती है |
ये बेटी फिर घबराकर के आत्मदाह कर लेती है |
उनकी बेटी कुवांरी रहती जिनके घर में तंगी है |
बेटो पर भी नही लंगोटी और बेटी अधनंगी है |
और इस बेटी की कहीं कहीं तो बहुत बड़ाई होती है |
और कहीं पे इस की खातिर विकट लड़ाई होती है |
इस बेटी की आज जुबाँ पर लगा हुआ क्यों ताला है
इस बेटी पर कवियों ने भी आलखंड लिख डाला है |
नही सुरक्षित है क्यों बेटी बोलो बंद मकानों में |
इस बेटी की इज्जत हमने लुटती देखी थानों में |
मिटा सको तो आगे बढकर उसकी खुरच मिटा दो रे |
देश भक्ति जन सेवा क्या है ये सबको बतलादो रे |
४
ये बेटी है महालक्ष्मी और भूखी प्यासी भी है |
और अभागन है ये बेटी और कहीं दासी भी है |
इस बेटी के लिए भीम ने तोड़ के रख दी जंघा भी |
ये बेटी कावेरी भी है, जमना भी और गंगा भी |
खुद की चिंता नही है इसको ओरो के गम धोती है |
और ये बेटी सिर्फ़ रात में छह घंटे ही सोती है |
इस बेटी की त्याग तपस्या गली गली में बिखरी है |
ये बेटी है सती अनुसुइया और सति सावित्री है |
खुल कर के आगे आजाओ अब पूरी तयारी से |
इस बेटी कों मुक्त कराओ नफरत की बीमारी से |
आज जो मसला उलझ रहा है वो इनके सम्मान का है |
दोष अकेले नही किसी का सारे हिन्दुस्तान का है |
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